मानव रक्त (Human Blood):- Plasma,Corpuscles RBC,WBC and Platelets


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मानव रक्त ( Human Blood )



  • रक्त एक प्राकृतिक कोलाइड ( गाढा ) है।

  • मानव रक्त (Human Blood) एक संयोजी उत्तक है।इसका pH मान 7.4 होता है, अर्थात रक्त क्षारीय होता है।

  • महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा आधा लीटर रक्त कम होता है।

  • मानव रक्त ( Human Blood ) विभिन्न पोषक पदार्थ तथा गैसों का परिवहन करता है।

  • इसका निर्माण कुल क्षृण ( बच्चा ) अवस्था में मिसोडर्म में होता है। वयस्क मानव में रक्त निर्माण अस्थिमज्जा में होता है। रक्त पलीहा या तिल्ली ( Spleen ) में जमा रहता है, अर्थात Spleen को Blood Bank कहां जाता है।

  • रक्त परिसंचरण की खोज ' विलियम हार्वे ' ने किया।

  • इसमें कोलेस्ट्रोल का सामान्य स्तर 180 से 200 gm होता है।


रक्त में दो प्रकार के पदार्थ पाए जाते हैं-


1. प्लाज्मा ( Plasma )


2. रूधिराणु / रक्त कण ( Blood Corpuscles )


1. प्लाज्मा (Plasma):- यह रक्त का महत्वपूर्ण भाग है, इसका 90% भाग जल होता है। और 10% भाग में प्रोटीन तथा कार्बोहाइड्रेट होता है, प्लाज्मा में पाए जाने वाला प्रोटीन फाइब्रिनोजेन तथा प्रोथोम्बिन होता है। यह दोनों प्रोटीन रक्त को थक्का बनाने में मदद करता है, और यह रक्त का अजीवित तरल भाग होता है। पचे हुए भोजन एवं हार्मोन का शरीर में संवहन प्लाज्मा के द्वारा होता है।


सेरम (Serum):- जब रक्त प्लाज्मा में से फाइब्रिनोजेन नामक प्रोटीन निकाल लेते हैं, तो शेष बचा हुआ प्लाज्मा ही सेरम कहलाता है। सिरम हल्के पीले रंग का होता है। बीमारियों की जांच में सेरम को ही लिया जाता है।  


2. रूधिराणु ( Corpuscles ) : यह रक्त का कणिकीय भाग है। इसे तीन भागों में बांटते हैं।


1. RBC ( Red Blood Corpuscles ) लाल रक्त कणिका


2.WBC (White Blood Corpuscles ) श्वेत रक्त कणिका 3. Platelets ( बिम्बाणु )


1. RBC (Red Blood Corpuscles):-



  • रुधिराणु का 99% भाग RBC होता है। RBC की कुल संख्या 5 मिलियन ( 10 लाख ) होती है।

  • RBC में केंद्रक तथा लाइसोसोम नहीं पाया जाता है।

  • इसका जीवनकाल 120 दिन का होता है।

  • इसका निर्माण अस्थिमज्जा में होता है। भ्रूण अवस्था में इसका निर्माण यकृत ( liver ) में होता है। खराब हुई RBC प्लीहा ( Spleen ) तथा यकृत ( liver ) में जाकर नष्ट हो जाता है Spleen को RBC का कब्र या Grave Yard कहते हैं।

  • RBC को एरिथोसाइट ( Erythrocytes ) भी कहते हैं।

  • इसका मुख्य कार्य ऑक्सीजन को शरीर की हर कोशिका में पहुंचाना एवं कार्बन डाइऑक्साइड को वापस लाना होता है।

  • RBC में हिमोग्लोबिन पाया जाता है और हिमोग्लोबिन में हिम ( Haem ) नामक रंजक होता है इसी के कारण रक्त लाल होता है।

  • हिमोग्लोबिन में लोहा ( Iron ) होता  है।

  • पुरुष में हीमोग्लोबिन का स्तर 149m प्रति 100 ML होता है जबकि महिलाओं में हीमोग्लोबिन 139m प्रति 100 ML होता है।

  • हीमोग्लोबिन की कमी के कारण एनीमिया/अरक्तता या रक्तक्षीणता रोग होता है।


 


2.WBC (White Blood Corpuscles) श्वेत रक्त कणिका:-



  • इसकी संख्या 8000 से 10000 के बीच होता है।

  • इसमें केंद्रक होता है लेकिन इसमें हीमोग्लोबिन नहीं होता है। जिस कारण यह सफेद रंग का दिखता है।

  • इसका आकार एवं संरचना अमीबा ( Amoeba ) के समान होता है। यानी इसका आकार अनियमित होता है, इसका निर्माण अस्थिमज्जा में होता है।

  • इसका जीवनकाल 4 दिन होता है, इसका मृत्यु रक्त में ही हो जाता है।

  • WBC को ल्यूकोसाइट्स ( Levcocytes ) भी कहते हैं।

  • WBC हमें संक्रमण (बीमारी ) से बचाता है, अर्थात रोगों से हमारी रक्षा करता है।


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3. Platelets (बिम्बाणु):-



  • इसे थ्रांबोसाइट ( Thrombocytes ) भी कहते हैं। यह रक्त को थक्का बनाने में मदद करता है, अर्थात यह रक्त के बहाव को रोकता है। यह रंगहीन होता है।

  • इसका जीवनकाल 4 से 5 दिन होता है। प्रति घन मीटर में इसकी संख्या 2 से 3 लाख होता है। डेंगू बीमारी में इसकी संख्या 50000 से भी कम हो जाता है, अर्थात डेंगू बीमारी में Platelets की कमी हो जाती है।

  • इसमें केंद्रक नहीं होता है, इसका निर्माण अस्थिमज्जा (Bone marrow) में होता है।

  • यह शरीर के तापमान को नियंत्रण तथा रोगों से बचाता है।

  • रक्त पचे भोज्य पदार्थ का परिवहन करता है।

  • रक्त हार्मोन Co2 तथा O2 का परिवहन करता है।

  • यह उत्सर्जित पदार्थ का निष्कासन करता है।


लासिका (Lymph):-


यह हल्के पीले रंग का तरल होता है। इसमें हिमोग्लोबिन मौजूद नहीं होते हैं। शरीर में बहुत सारी लासीका ग्रंथि पायी जाती है। जिससे लासिका निकल कर आगे प्रवाहित होता है। लसिका प्रभाव केवल एक दिशा में होता है। अर्थात यह कोशिकाओं के हृदय की ओर जाती है। लसिका शरीर को संक्रमण से बचाता है तथा शरीर में अतिरिक्त जल को अवशोषित कर लेता है। लासिका में O2 के अपेक्षा Co2 की मात्रा अधिक होता है। यह घाव भरने का कार्य करता है। यह रक्त में RBC तथा Platelets के अंदर नहीं पाया जाता है। पोलियो बीमारी में लासिका तंत्र प्रभावित हो जाता है।




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