विदेशी कंपनियों का आगमन का क्रम एवं स्थल (sequence of european companies in india and Place)
कंपनी (Company) - पुर्तगाली ईस्ट इंडिया कंपनी ( इस्तादो द इंडिया)
देश (Country) - पुर्तगाल
स्थापना (Establishment) - 1498 ई०
स्थल (site) – कालीकट
विवरण (Description) - अलबूकर्क(वास्तविक संस्थापक)
कंपनी (Company) - डच ईस्ट इंडिया कंपनी ( वैरेनिगडे ओस्टिन्डीश कंपनी)
देश (Country) - डच
स्थापना (Establishment) - 1602 ई०
स्थल (site) – मसूलीपटटनम
कंपनी (Company) - अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी
देश (Country) – अंग्रेज
स्थापना ( Establishment) - 1600 ई०
स्थल (site) – सूरत
विवरण (Description) - सूरत व मसूलीपत्तनम्
कंपनी (Company) - डेनिस ईस्ट इंडिया कंपनी
देश (Country) - डेनिस
स्थापना (Establishment) - 1616 ई०
स्थल (site) – त्रंकोबर
विवरण (Description) - कुछ स्थलों पर कोठी स्थापित
कंपनी (Company) - फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी
देश (Country) – फ्रांसीसी
स्थापना (Establishment) - 1664 ई०
स्थल (site) – सूरत
कंपनी (कंपनी) - स्वीडिश ईस्ट इंडिया कंपनी
देश (Country) - स्वीडिश
स्थापना (Establishment) - 1731 ई०
स्थल (site) – गोहनबर्ग
पुर्तगाली (Portuguse)
पुर्तगाली नाविक वास्कोडिगामा ने 1498 ई० में खोज की थी।
फ्रांसिस्को - डी - अलमीडा भारत में पहला पुर्तगाली गर्वनर था।
अल्फ्रांसों - डी - अल्बुकर्क भारत में पुर्तगाली सम्राज्य का वास्तविक संस्थापक था, वह 1509 ई० से 1515 ई० तक भारत में रहा। उसने 1510 ई० गोवा पर अधिकार कर उसे प्रमुख पुर्तगाली व्यापारिक केंद्र बनाया। कंपनी का प्रादुर्भाव हुआ
प्रारंभ में अल्फ्रांसों अल्बुकर्क ने कोचीन को मुख्यालय बनाया था। 1530 में नीनो - द - कुन्हा नामक वायसराय ने मुख्यालय कोचीन से गोवा स्थानांतरित कर दिया।
नए पुर्तगाली गर्वनर अल्फ्रांसों डिसूजा ( 1542-1545 ई०) के साथ प्रसिद्ध जेसुइट संत फ्रांसिस्को जेवियर भारत आए।
पुतगालियों के भारत आगमन से भारत में तंबाकू की खेती, आलू, जहाज, निर्माण एवं प्रिटिंग प्रेस का सूत्रपात हुआ। 1556 ई० में पुतगलियों ने भारत में प्रथम प्रिटिंग प्रेस स्थापित किया।
डच (Dutch)
1596 ई० में कॉरनेलिस - डी - हस्तमान, केप ऑफ गुड होप होते हुए सुमात्रा तथा बण्टाम पहुंचने वाला प्रथम डच नागरिक था।
20 मार्च, 1602 ई० को भारत में व्यापार के लिए प्रथम डच कंपनी 'यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी' का प्रादुर्भाव हुआ। इस कंपनी को डच संसद द्धारा 21 वर्षों तक के लिए भारत और पूर्व के देशों के साथ व्यापार करने, आक्रमण और विजय के संबंध में अधिकार पत्र दिया गया।
डचों ने भारत के कोरोमण्डल तट, बिहार, उत्तरप्रदेश, गुजरात तथा बंगाल में कारखाने स्थापित किए।
सत्रहवीं शताब्दी में भारत में मसाले के व्यापार पर डचों का एकाधिकार था। डचों द्धारा भारत से नील, शोरा एवं सूती वस्त्र का निर्यात किया जाता था।
बंगाल से डच मुख्यत: सूती वस्त्र, रेशम, शोरा और अफीम आदि का निर्यात करते थे।
अंग्रेज /English(British)
1599 ई० जॉन मिल्डेनहाल (ब्रिटिश यात्री) थल मार्ग से भारत आया था।
1599 ई० में इंग्लैंड में एक 'मर्चेंट एडवेंचर्स' नामक दल ने अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी (दी गवर्नर एंड कंपनी ऑफ मर्चेंट्स ऑफ ट्रेंडिंग इन टू द ईस्ट इंडीज) की स्थापना हुई, जैसे ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने 15 वर्षों के लिए पूर्वी व्यापार का एकाधिकार प्रदान किया।
1608 ई० में इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम के दूत के रूप में कैप्टन हॉकिंस, मुगल सम्राट जहांगीर से मिलने आगरा पहुंचा।
सम्राट जहांगीर ने हॉकिंस से प्रसन्न होकर उसे 400 का मनसब और जागीर प्रदान की थी।
1613 ई० में जहांगीर ने एक फरमान द्वारा अंग्रेजों को सूरत में स्थायी रूप से कोठी खोलने का अनुमति प्रदान की।
मुगल सम्राट जहांगीर से व्यापारिक संधि करने के उद्देश्य से इंग्लैंड के सम्राट जेम्स प्रथम का एक दूत 'सर टॉमस रो' 1615 ई० में जहांगीर के दरबार में आया।
अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी ने दक्षिण भारत में अपना पहला कारखाना 1611 ई० में मसूलीपट्टनम और पेटापली में स्थापित किया।
1633 ई० में पूर्वी तट पर अंग्रेज़ों ने अपना पहला कारखाना बालासोर और हरिहरपूरा में स्थापित किया था।
1698-99 ई० में बंगाल के सूबेदार अजीमुश्शान की स्वीकृति से कंपनी को 1,200 रुपए के भुगतान देने पर सुतानाटी, गोविंदपुर और कालिकाता की जमींदारी प्राप्त हुई।
कालिकाता, गोविंदपुर और सुतानाटी को मिलाकर आधुनिक नगर कलकत्ता की स्थापना जॉब चार्नोक ने की थी।
कालांतर में कलकत्ता में ही फोर्ट विलियम का निर्माण हुआ। 1700 ई० में स्थापित फोर्ट विलियन का प्रथम गवर्नर सर चार्ल्स आयर बना।
1715 ई० में मुगल सम्राट फर्रुखसियर के दरबार में एक अंग्रेजी प्रतिनिधिमंडल आया। इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल शल्य चिकित्सक हैमिल्टन ने फर्रुखसियर की एक दर्दनाक बीमारी को ठीक किया था, जिससे प्रसन्न होकर मुगल सम्राट ने 1717 ई० में तीन फरमान जारी करके कंपनी को उनके महत्वपूर्ण अधिकार दे दिए।
इसके तहत् अंग्रेजों को तीन हजार वार्षिक कर के अतिरिक्त और कुछ भी न देकर बंगाल में व्यापार करने के अधिकार की पुष्टि की गई। उन्हें किराये पर कलकत्ता के आसपास की अतिरिक्त भूमि लेने की अनुमति मिल गई।
इसके अतिरिक्त बम्बई में कंपनी द्वारा ढाले गये सिक्कों को संपूर्ण मुगल राज्य में पहली बार चलाने की अनुमति भी दे दी गई।
1717 ई० के मुगल सम्राट के फरमान को 'कंपनी मैग्नाकार्टा' कहा जाता है।
डेनिस (Dennis)
डेनमार्क की ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1616 ई० में हुई थी। इस कंपनी ने 1620 ई० में त्रैंकोबार (तमिलनाडु) और 1676 ई० में सेरामपुर (बंगाल) में अपनी व्यापारिक कोठियां स्थापित की थीं।
सेरामपुर डेनों का प्रमुख व्यापारिक केंद्र था। 1845 ई० में डेनों ने अपनी भारतीय वाणिज्यिक कंपनी को अंग्रेजों को बेच दिया।
फ्रांसीसी (French)
फ्रांसीसी सम्राट लुई चौदहवें के मंत्री कॉलबर्ट द्वारा 1664 ई० में 'फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी' की स्थापना की गई थी। इसे ''कंपनी देस इण्डेस ओरियण्टलेस' कहा जाता था।
1692 ई० मैं बंगाल में शाइस्ता खां (बंगाल का मुगल सूबेदार), की अनुमति से फ्रेंच कंपनी ने चंद्रनगर की स्थापना की।
1731 ई० में चंद्रनगर के प्रमुख फ्रांसीसी गवर्नर डूप्ले की नियुक्ति से भारत में फ्रांसीसी प्रभावी बने।
1668 ई० में फ्रेंसिस कैरो के नेतृत्व में इस कंपनी ने सूरत में अपना प्रथम व्यापारिक कारखाना स्थापित किया।
1669 ई० में मर्कारा ने गोलकुंडा के सुल्तान की स्वीकृति से मसूलीपट्टनम में दूसरी फ्रेंच फैक्ट्री को स्थापित की।
1673 ई० में कंपनी के निदेशक फ्रासिंस मार्टिन ने बलिकोण्डापुर के सूबेदार शेरखां लोदी से पुर्दुचुरी नामक एक गांव प्राप्त किया, जिसे कालांतर में पाण्डिचेरी नाम से प्रसिद्धि मिली।
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