दोस्तों हर किसी के मन में सवाल हैं। कि महान्यायवादी क्या होता हैं।, महान्यायवादी का वेतन कितना है। , महान्यायवादी का कार्यकाल कितना होता है। तो आज आपको इन सवाल के जबाव इस आर्टिकल में मिल जायेगे(भारत के महान्यायवादी)
महान्यायवादी भारत सरकार का प्रथम विधि/कानूनी अधिकारी होता हैं। यह भारत सरकार को कानूनी सहायता प्रदान करता है। अगर भारत सरकार किसी भी कानून को पारित करना चाहता है।या फिर किसी अनुच्छेद में संशोधन करना चाहता है तो उसकी सलाह भारत के महान्यायवादी (Attorney General of India ) द्वारा ही दी जाती है।
महान्यायवादी न ही संसद के सदस्य होते हैं। और न ही कोई मंत्रिमंडल के सदस्य होते हैं। लेकिन वह किसी भी सदन या समिति में बोल सकते हैं। यानी अपने विचार विमर्श को व्यस्त कर सकते हैं। किंतु उन्हें अनुच्छेद-88 के तहत मत यानी वोट देने का अधिकार नहीं होता है। महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। और इसका त्यागपत्र भी राष्ट्रपति द्वारा ही स्वीकार किया जाता है। इसका कार्यकाल निश्चित नहीं होता है। यह राष्ट्रपति के इच्छा अनुसार बना रह सकता है। इसलिए यह पूर्णकालिक नहीं होते हैं। भारत के वर्तमान महान्यायवादी(Attorney General of India) केके वेणुगोपाल हैं।
भारत के महान्यायवादी (Attorney General of India ) को भारत के किसी भी न्यायालय में मुकदमा लड़ने का अधिकार होता है। क्योंकि इसकी योग्यता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर होता है। यह सरकार का पैरवी/मुकदमा लड़ते हैं। यह निजी व्यक्तियों का भी मुकदमा लड़ सकता है लेकिन वह सरकार के विरोध कोई भी मुकदमा नहीं लड़ सकता है। इसको वेतन नहीं दिया जाता है। किंतु भत्ते दिए जाते हैं। वेतन इसलिए नहीं दिया जाता है। क्योंकि जब वह निजी व्यक्ति का मुकदमा लड़ता है। तो उससे मुकदमा लड़ने का वह पैसा लेता है। इसलिए उन्हें वेतन नहीं दिया जाता है। भारत के महान्यायवादी के बारे में अनुच्छेद-76 में वर्णन किया गया है।
राज्य सरकार को कानूनी सहायता देने के लिए महाधिवक्ता होते हैं। और इसकी नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा की जाती है। इसकी योग्यता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर होते हैं।इसे राज्य के किसी भी न्यायालय के समक्ष सुनवाई का अधिकार है। इसे वेतन नहीं दिया जाता है लेकिन भत्ते दिए जाते हैं। इसका वर्णन अनुच्छेद-165 में किया गया है।
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[…] संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को नई दिल्ली में हुई ,जिसमें डॉ सच्चिदानंद को विधानसभा के अंतरिम अध्यक्ष ( अस्थाई अध्यक्ष )के रूप में चुना गया । 11 दिसंबर 1946 को डॉ राजेंद्र प्रसाद को अध्यक्ष और एच०सी० मुखर्जी को संविधान सभा के उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया था जोकि स्थाई सदस्य थे।और जाने:-भारत के महान्यायवादी – Attorney General of India […]
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